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बुधवार, 9 जून 2021

अन्तर्मन

सूना सूना जग लगे

मोह मोह सा त्यागे..


सन सन से लागे

मन मन ये भागे..


रुके रुके ठगे ठगे

कदम यूँ टँगे टँगे..


भूले भूले अपने लगे

खून खून पानी लगे..


भले भले क्यों लगे

काम तलाशने लगे..


लुटे लुटे मिटे मिटे

सगे सगे मुड़े मुड़े..


बहे बहे अविरल यें

क्यों रहें "व्याकुल" से..


©️व्याकुल

नियामत खाना

यह बात 80 के दशक की होगी। नानी के घर एक जालीदार अलमारी थी इसे उर्दू में नियामत खाना भी कहते है। यह अलमारी नानी के अपने छोटे से कमरे में थी। ...