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मंगलवार, 23 नवंबर 2021

जाल

सदियों

की शोषित

परम्परा

जाल का 

खेल

कौन 

नही बुनता..


और

शिकारी

टकटकी

लगाये रहता

फिर 

मादकता 

से

चमक उठता

मांसल से

देह का..

@व्याकुल

नियामत खाना

यह बात 80 के दशक की होगी। नानी के घर एक जालीदार अलमारी थी इसे उर्दू में नियामत खाना भी कहते है। यह अलमारी नानी के अपने छोटे से कमरे में थी। ...