यह बात 80 के दशक की होगी। नानी के घर एक जालीदार अलमारी थी इसे उर्दू में नियामत खाना भी कहते है। यह अलमारी नानी के अपने छोटे से कमरे में थी। इस पर ताला लगा रहता था। नानी इसमें दूध व मलाई इत्यादि रखती थी। हम लोगो के लिये बस यही high demanding चीज थी। यह हमेशा बंद रहता था और इसकी चाभी नानी के गले में रहती थी।
नानी थी तो बहुत सक्रिय पर जब सोती थी तो बेसुध। उनके गले से चाभी निकालना फिर मलाई खाना हमेशा challenging रहता था। हम लोग यह काम बखूबी करते थे। नानी कों कभी पता ही नहीं चला कि उनके गले से चाभी कैसे निकल जाती थी।
सूंघते हुए अगर बिल्ली आ जाये उसको भगाने का भी काम हम लोग करते थे। आखिर एक म्यान में दो तलवार कैसे रह सकती थी...
@डॉ विपिन