अनंत चतुर्दशी के दिन मेरे मनो मस्तिष्क में एकाएक एक घटना आकर अटक गयी जो वर्षो पूर्व घटित हुई थी जिसका जिक्र राहुल सांकृत्यायन ने अपनी पुस्तक "कनैला की कथा" और "मेरी जीवन यात्रा" में किया है।
आस पास तड़पते लोगो को देखना और कुछ न कर पाना कितनी कोफ़्त होती है न। व्याकुलता ऐसे ही थोड़े न जन्म लेती है। कितना तड़प चुका होगा वो। रक्त का एक एक कतरा बह रहा होगा। दिल से कह ले या आँखों से। ह्रदय ग्लानि से कितना विदीर्ण हो चुका होगा। पैर भी ठहर गए होंगे। असहाय इस दुनिया में सिवाय एक निर्जीव शरीर के।
FOLLOWER
मंगलवार, 1 जून 2021
अनंत चतुर्दशी व मलॉव के पाण्डेय
फिल्म फोटो
एक बालक जिसे बचपन से ही गणित में मन कम लगता था। कल्पना व जादूई दुनिया में रहने वाला। गणित की कक्षा में कॉपी में चित्र बनाना। प्रकृति से बात करना।
भ्रमजाल
फिल्म न्यूटन और जम्मू कश्मीर चुनाव - 6
फिल्म न्यूटन और जम्मू कश्मीर चुनाव - 5
फिल्म न्यूटन और जम्मू कश्मीर चुनाव - 4
रविवार, 30 मई 2021
फिल्म न्यूटन और जम्मू कश्मीर चुनाव - 3
गतांक से आगे...
चुनाव में जाने से पहले धर्म ग्रन्थ "गीता" ले जाने को कहा गया था। एक छोटा ट्रांजिस्टर भी। मै अपना परिवार प्रयागराज छोड़ आया था।
फिल्म न्यूटन और जम्मू कश्मीर चुनाव - 2
फिल्म न्यूटन और जम्मू कश्मीर चुनाव - 1
पढ़ने की आदत और पुस्तकालय
आज की पीढ़ी और आने वाले समय में समाज को एक भयंकर समस्या से ग्रसित होना है.. वह है "पढ़ने की आदत" की समस्या। पुस्तकालयों की मनोदशा के अंदर झाँक कर देखिये। किताबों पर पड़ती धूल। कॉलेजों में कुछ assignment ऐसे मिले जिसमें सप्ताह में एक दिन किसी पब्लिक पुस्तकालय में कम से कम 4-5 घंटे अध्ययन करे व संबंधित प्रोजेक्ट पर कुछ अंक भी निर्धारित हो। पुस्तकालय कदम रखते ही बच्चों को और भी विषय सामग्रियों से वास्ता पड़ेगा जिससे उनमें अध्ययन की आदत पड़ेगी। अध्ययन से विभिन्न विचारों को जानने समझने का मौका मिलता है व खुद के भी विचारों का जन्म होता है। ऐसे ही बड़े विचारकों का जन्म नही हुआ होगा जरूर वे महान पुस्तकालयों की शरण में गये होंगे।
नियामत खाना
यह बात 80 के दशक की होगी। नानी के घर एक जालीदार अलमारी थी इसे उर्दू में नियामत खाना भी कहते है। यह अलमारी नानी के अपने छोटे से कमरे में थी। ...
-
सारे जवां आहा नाचे-नाचे अऊआ अऊआ, अऊआ अऊआ बप्पी लहरी का यें गाना खूब जोरो पर था। समग्र प्रताप कुछ दिन पहले ही मोहल्ले में आया था। वह महाराष...
-
सभी डाकडर बाबू को हमरे तरफ से भी शुभकामनाएँ... हमरे गॉव के नजदीक मनीगंज नाम क एक जगहा बा। मनीगंज नाम से पाठक लोगन के लगत होये किं कौनो धनी...







